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मठ-मंदिर, मदरसा और वक्फ बोर्ड पर सरकारी कंट्रोल की जंग, कांग्रेस समर्थन में तो संत विरोध में उतरे

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Central Lensवरिष्ठ संवाददाता
बुधवार, 4 नवंबर 2026•4 मिनट पठन
मठ-मंदिर, मदरसा और वक्फ बोर्ड पर सरकारी कंट्रोल की जंग, कांग्रेस समर्थन में तो संत विरोध में उतरे
मठ-मंदिर, मदरसा और वक्फ बोर्ड पर सरकारी कंट्रोल की जंग, कांग्रेस समर्थन में तो संत विरोध में उतरे (सांकेतिक तस्वीर)

मध्य प्रदेश में मठ-मंदिरों, मदरसों और वक्फ बोर्ड को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मांग को लेकर बहस तेज हो गई है। मुस्लिम समाज संगठन ने धार्मिक संस्थाओं को स्वतंत्र रूप से काम करने और अपनी प्रबंधन समितियां चुनने का अधिकार देने की मांग की है। इस मांग पर कांग्रेस ने समर्थन जताया है, जबकि महामंडलेश्वर अनिलानंद महाराज ने इसका विरोध किया है। वहीं, भाजपा सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने कहा कि देश में सभी व्यवस्थाएं संविधान के दायरे में ही चलेंगी।

मुस्लिम समाज संगठन ने उठाई धार्मिक संस्थाओं को स्वतंत्र करने की मांग

मुस्लिम समाज संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मौलाना अब्दुल समद ने कहा कि संगठन पिछले 40 वर्षों से धार्मिक संस्थाओं को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की मांग करता आ रहा है।

उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधन समिति का उदाहरण देते हुए कहा कि धार्मिक संस्थाओं को भी अपनी प्रबंधन समितियां चुनने का अधिकार मिलना चाहिए, ताकि वे अपने मामलों का संचालन स्वतंत्र रूप से कर सकें।

मौलाना अब्दुल समद का कहना है कि सरकारी नियंत्रण के बावजूद धार्मिक स्थलों से जुड़े विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में हर धर्म को अपनी धार्मिक संस्थाओं का संचालन स्वतंत्र रूप से करने का अधिकार मिलना चाहिए।

महामंडलेश्वर अनिलानंद महाराज ने किया विरोध

मुस्लिम समाज संगठन की मांग पर महामंडलेश्वर अनिलानंद महाराज ने असहमति जताई। उन्होंने मंदिरों, मठों और मदरसा बोर्ड पर सरकारी नियंत्रण बनाए रखने की पैरवी की।

उन्होंने आशंका जताई कि यदि मदरसों से सरकारी नियंत्रण हटा दिया गया, तो वहां आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। उन्होंने पाकिस्तान से आतंकवादियों के आने का जिक्र करते हुए आशंका व्यक्त की कि भविष्य में देश के मदरसों का दुरुपयोग भी किया जा सकता है।

उनके बयान के साथ धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता और सरकारी निगरानी को लेकर बहस का एक अलग पक्ष सामने आया है।

कांग्रेस ने किया मांग का समर्थन

कांग्रेस ने मुस्लिम समाज संगठन की मांग का समर्थन किया है। पार्टी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने कहा कि मंदिरों और वक्फ बोर्ड जैसी धार्मिक संस्थाओं पर पूर्णकालिक सरकारी नियंत्रण नहीं होना चाहिए।

उन्होंने संविधान में दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने और दूसरे धर्मों का सम्मान करने की स्वतंत्रता है। उनके मुताबिक, धार्मिक आस्था से जुड़ी संस्थाओं के संचालन में सरकारी नियंत्रण की भूमिका पर विचार किया जाना चाहिए।

BJP सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने क्या कहा?

इस मुद्दे पर भाजपा सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने कहा कि देश में कानून और सरकार किसी समुदाय की मांग के आधार पर नहीं, बल्कि संविधान के अनुसार चलेंगे।

उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान से ऊपर कोई नहीं है और सभी को संवैधानिक व्यवस्था के दायरे में रहना चाहिए।

धार्मिक संस्थाओं के नियंत्रण पर अलग-अलग रुख

मध्य प्रदेश में धार्मिक संस्थाओं को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के मुद्दे पर अलग-अलग पक्षों के विचार सामने आए हैं।

  • मुस्लिम समाज संगठन: धार्मिक संस्थाओं को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर स्वतंत्र प्रबंधन का अधिकार देने की मांग।
  • महामंडलेश्वर अनिलानंद महाराज: मंदिरों, मठों और मदरसा बोर्ड पर सरकारी नियंत्रण बनाए रखने की पैरवी।
  • कांग्रेस: मंदिरों और वक्फ बोर्ड जैसी संस्थाओं पर पूर्णकालिक सरकारी नियंत्रण के खिलाफ रुख।
  • भाजपा सांसद दर्शन सिंह चौधरी: सभी व्यवस्थाओं को संविधान और कानून के दायरे में चलाने पर जोर।

फिलहाल, इस मुद्दे पर विभिन्न संगठनों और राजनीतिक पक्षों के बीच मतभेद सामने आए हैं। बहस का केंद्र धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता, उनके प्रबंधन और सरकारी निगरानी की भूमिका है।

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Central Lens संपादकीय टीम

यह रिपोर्ट Central Lens के समाचार कक्ष द्वारा तथ्यों की पुष्टि और निष्पक्ष पत्रकारिता के मानकों के तहत तैयार की गई है।

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